Tuesday, August 10, 2010


वेदना का मोन निमंत्रण
आँख से चल पड़ा,
ना जाने कोनसे मन पे
देगा दस्तक .....
किस मन से पायेगा
अनुभूति का आधार
किस हर्प में
शब्द बन जुडेगा ...
ना जाने किस कथा का
होगा आधार ..
आबे -गंगा से भी
पूछ लेगा ,
कितना मैला में ,
तू कितना पावन ...
दर्द मेने दिल का धोया
तुने धोया किसका अंतर्मन ....?

प्रवेश सोनी
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4 comments:

  1. aap ka shabdkosh bahut rich hai or shabdo ko bunna khoob aataa hai apko..:)

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  2. शुक्रिया डिम्पल

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  3. kya kahun Soni jee...sachh behadd umda likhti hain aap.

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  4. शुक्रिया नीलू जी

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